नरसिंहपुर।13 जून 2026 शुक्र प्रदोष व्रत के अवसर पर पोलखोल न्यूज़ से विशेष बातचीत में पंडित लक्ष्मण वैष्णव ने प्रदोष काल के महत्व, भगवान शिव की आराधना और वर्तमान युवा पीढ़ी की धार्मिक जागरूकता पर अपने विचार व्यक्त किए।
उन्होंने बताया कि त्रयोदशी तिथि की संध्या बेला को प्रदोष काल कहा जाता है, जो भगवान शिव की उपासना के लिए अत्यंत शुभ माना गया है। धार्मिक मान्यता है कि इस समय भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना करने से विशेष पुण्य फल की प्राप्ति होती है तथा जीवन के कष्ट दूर होते हैं।
पंडित वैष्णव ने कहा कि धर्मशास्त्रों में प्रदोष काल के दौरान भोजन, शयन (सोना) आदि का उल्लेख मिलता है। उनका कहना है कि यह समय सांसारिक विषयों से दूर रहकर भगवान शिव के ध्यान, जप, तप और आराधना के लिए समर्पित होना चाहिए। प्रदोष काल में की गई भक्ति व्यक्ति के मानसिक और आध्यात्मिक विकास में सहायक होती है।
युवा पीढ़ी को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आज के समय में धर्म को केवल कर्मकांड तक सीमित नहीं समझना चाहिए। धर्म सत्य, संस्कार, अनुशासन और मानवता का मार्ग दिखाता है। यदि युवा अपने धर्म और संस्कृति को समझेंगे तो समाज और राष्ट्र दोनों मजबूत होंगे।
उन्होंने श्रद्धालुओं से प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव का अभिषेक करने, बेलपत्र अर्पित करने तथा “ॐ नमः शिवाय” और महामृत्युंजय मंत्र का जाप करने की अपील की। उनके अनुसार सच्ची श्रद्धा और विश्वास के साथ की गई शिव आराधना भक्तों को सुख, शांति और समृद्धि प्रदान करती है।
पंडित लक्ष्मण वैष्णव ने कहा कि प्रदोष व्रत केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का अवसर भी है। इस अवसर पर श्रद्धालुओं को धर्म के मूल सिद्धांतों को समझते हुए अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का प्रयास करना चाहिए।
पोलखोल न्यूज़ के धर्म विशेष कार्यक्रम में देखिए पंडित लक्ष्मण वैष्णव की पूरी चर्चा और जानिए प्रदोष व्रत का महत्व, धर्म का सत्य और युवा पीढ़ी की जिम्मेदारी।








