नरसिंहपुर। 7 जून 2026 संस्कारधानी नरसिंहपुर में पुरुषोत्तम मास के पावन अवसर पर स्थानीय तुलसी मानस भवन (सदर मढ़िया) में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का भव्य एवं भावपूर्ण समापन हुआ। समस्त मातृशक्ति संगठन के तत्वावधान में आयोजित इस आध्यात्मिक आयोजन के अंतिम दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी और पूरा परिसर भक्तिमय वातावरण से सराबोर हो गया।
कथा के सातवें एवं अंतिम दिवस सुप्रसिद्ध कथा वाचक श्रद्धेय पंडित संतोष रामशंकर जी महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण और उनके परम मित्र सुदामा के मिलन का मार्मिक प्रसंग सुनाया। कथा के दौरान जब महाराज जी ने वर्णन किया कि किस प्रकार द्वारिकाधीश भगवान श्रीकृष्ण अपने निर्धन मित्र सुदामा को देखकर नंगे पैर दौड़ पड़े और प्रेमपूर्वक उन्हें गले लगाकर उनके चरणों को अपने अश्रुओं से धोया, तो उपस्थित श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं। महाराज जी ने बताया कि सच्ची मित्रता स्वार्थ नहीं, बल्कि समर्पण, प्रेम और विश्वास पर आधारित होती है।
इसके पश्चात उन्होंने पारिजात वृक्ष के दिव्य प्रसंग का वर्णन करते हुए उसके आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डाला। वहीं नवयोगेश्वर संवाद एवं भगवान दत्तात्रेय के 24 गुरुओं की कथा सुनाते हुए बताया कि प्रकृति का प्रत्येक तत्व हमें जीवन के महत्वपूर्ण पाठ सिखाता है। उन्होंने कहा कि सीखने की भावना रखने वाला व्यक्ति संपूर्ण सृष्टि से ज्ञान प्राप्त कर सकता है।
कथा के अंतिम चरण में यदुवंश के उपसंहार, भगवान श्रीकृष्ण के स्वधाम गमन तथा राजा परीक्षित को भागवत श्रवण के पुण्य से प्राप्त मोक्ष की कथा का वर्णन किया गया। इसके साथ ही सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा को विधिवत विश्राम दिया गया।
कथा समापन के उपरांत मुख्य यजमानों एवं समस्त मातृशक्ति संगठन द्वारा व्यास पीठ और श्रीमद्भागवत महापुराण का विधिवत पूजन एवं आरती की गई। वैदिक मंत्रोच्चार के मध्य यज्ञशाला में विश्व कल्याण की कामना के साथ पूर्णाहूति सम्पन्न हुई।
दोपहर 12 बजे से विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने श्रद्धापूर्वक महाप्रसाद ग्रहण किया। आयोजन समिति ने इस सफल एवं भव्य आयोजन में सहयोग देने वाले जिला प्रशासन, पत्रकार बंधुओं, समाजसेवियों, सहयोगकर्ताओं तथा सभी धर्मप्रेमी श्रद्धालुओं के प्रति आभार व्यक्त किया।
सात दिनों तक चली इस कथा में नगर की मातृशक्तियों और श्रद्धालुओं की सक्रिय सहभागिता ने आयोजन को ऐतिहासिक स्वरूप प्रदान किया। पूरे आयोजन के दौरान भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम देखने को मिला।








