नरसिंहपुर ! 17 अगस्त 2026
तेंदूखेड़ा। ग्रामीण क्षेत्रों को मुख्य मार्गों से जोड़ने के लिए बनाई गई सड़कों पर क्षमता से अधिक भारी वाहनों के संचालन से सड़कें क्षतिग्रस्त होने और ग्रामीणों के आवागमन में परेशानी के आरोप सामने आए हैं। ग्राम पंचायत खमरिया के अंतर्गत खमरिया-कन्हेरी मार्ग को लेकर ग्रामीणों और किसानों ने गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि करीब 10 टन भार सहन करने की क्षमता वाली सड़क पर कथित तौर पर 70-70 टन तक भार वाले पत्थर से लदे कंटेनर निकल रहे हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि भारी वाहनों की आवाजाही से सड़क कई स्थानों पर टूटने लगी है। यही मार्ग कृषि उपज के परिवहन और ग्रामीणों के आवागमन का प्रमुख साधन है। भारी वाहनों के कारण सड़क के साथ-साथ गांव की पेयजल व्यवस्था प्रभावित होने की बात भी ग्रामीणों ने कही है।
शिकायत के बावजूद कार्रवाई पर सवाल
ग्रामीणों के अनुसार, कुछ दिनों पहले दो भारी कंटेनर एक साथ इस मार्ग से गुजर रहे थे। इनमें से एक अत्यधिक भार के कारण रास्ते में फंस गया और ग्राम पंचायत द्वारा जल संरक्षण के लिए किए गए कार्य को नुकसान पहुंचा। घटना की सूचना तहसील स्तर के राजस्व अधिकारियों और जिला स्तर के खनिज अधिकारियों को दिए जाने का दावा किया गया, लेकिन ग्रामीणों के मुताबिक तत्काल प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
दोनों वाहन करीब छह घंटे तक मौके पर खड़े रहने के बाद रवाना हो गए।
खनन पट्टे और उत्पादन क्षमता को लेकर भी सवाल
ग्रामीणों ने क्षेत्र में संचालित एक खनिज पट्टे को लेकर भी जांच की मांग की है। आरोप है कि संबंधित पट्टे में लाइमस्टोन, डोलोमाइट और मार्बल ब्लॉक के उत्खनन की अनुमति को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है, जबकि स्वीकृत वार्षिक उत्पादन क्षमता केवल 4000 टन बताई जा रही है।
इसके बावजूद क्षेत्र से नियमित रूप से भारी वाहनों में मार्बल ब्लॉक के परिवहन के आरोप लगाए जा रहे हैं।
स्थानीय लोगों का यह भी आरोप है कि स्वीकृत सीमा से अधिक खनिज उत्खनन किया जा रहा है और मार्बल ब्लॉक के परिवहन एवं विक्रय में लाइमस्टोन तथा डोलोमाइट की रॉयल्टी का इस्तेमाल किए जाने की आशंका है। यदि ये आरोप सही पाए जाते हैं तो शासन को राजस्व नुकसान होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।
4000 टन स्वीकृति तो कितना हुआ उत्खनन?
ग्रामीणों की मांग है कि खदान शुरू होने की तारीख से अब तक के संपूर्ण उत्पादन रिकॉर्ड, रॉयल्टी भुगतान, परिवहन पास, बिक्री विवरण और मौके पर हुए वास्तविक उत्खनन का तकनीकी स्तर पर मिलान कराया जाए। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि स्वीकृत 4000 टन की वार्षिक सीमा के मुकाबले वास्तव में कितना खनिज निकाला और परिवहन किया गया।
ग्रामीणों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराए जाने और अनियमितता मिलने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई तथा शासन को हुई संभावित राजस्व क्षति की वसूली की मांग की है।
मामला अब केवल सड़क की क्षमता से अधिक भार वाले वाहनों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि खनन, परिवहन और प्रशासनिक निगरानी को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।








