14 घंटे की नो-एंट्री से रेत-गिट्टी व्यापार प्रभावित, ट्रांसपोर्टरों ने जताई चिंता

नरसिंहपुर। 7 जुलाई 2026  कलेक्टर द्वारा स्टेट हाईवे क्रमांक 22 (गाडरवारा–पिपरिया मार्ग) और स्टेट हाईवे क्रमांक 44 (गाडरवारा–उदयपुरा मार्ग) पर भारी वाहनों के लिए सुबह 7 बजे से रात 9 बजे तक लागू नो-एंट्री आदेश का असर अब रेत, गिट्टी और अन्य निर्माण सामग्री के कारोबार पर दिखाई देने लगा है। वाहन मालिकों, ट्रांसपोर्टरों और व्यापारियों का कहना है कि इस व्यवस्था से परिवहन प्रभावित हो रहा है, जिससे आने वाले दिनों में निर्माण सामग्री के दाम बढ़ सकते हैं।

व्यापारियों के अनुसार नरसिंहपुर जिले में उपयोग होने वाली करीब 70 प्रतिशत गिट्टी गाडरवारा, करेली, पिपरिया और सालीचौका क्षेत्र के माध्यम से सागर जिले से आती है। सागर की गिट्टी अपेक्षाकृत सस्ती और मजबूत होने के कारण इसकी मांग अधिक रहती है। इसके अलावा इलेक्ट्रॉनिक सामान सहित अन्य वस्तुओं की आपूर्ति भी इसी मार्ग से बड़े पैमाने पर होती है।

ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि 14 घंटे की नो-एंट्री के कारण एक दिन में खाली होने वाला वाहन अब दो दिन में खाली हो रहा है। रात में माल उतारने के लिए पर्याप्त मजदूर उपलब्ध नहीं होने से परिवहन लागत बढ़ रही है। इससे वाहन मालिकों का खर्च बढ़ने के साथ व्यापारियों को भी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

वाहन मालिकों ने यह भी बताया कि गिट्टी परिवहन में रॉयल्टी से जुड़ी अलग शर्तें होती हैं, जिससे परिचालन और अधिक प्रभावित हो रहा है। उनका कहना है कि यदि वर्तमान व्यवस्था लंबे समय तक जारी रही तो वाहन मालिकों और ट्रांसपोर्टरों की रोजी-रोटी पर भी संकट खड़ा हो सकता है।

हालांकि, ट्रांसपोर्टरों ने स्पष्ट किया है कि वे सड़क सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और प्रशासन द्वारा ओवरलोडिंग तथा बिना तिरपाल के खनिज परिवहन पर की जा रही कार्रवाई का समर्थन करते हैं। उनकी मांग है कि जनहित और व्यापारिक गतिविधियों के बीच संतुलन बनाते हुए नो-एंट्री के समय में व्यावहारिक संशोधन किया जाए, ताकि परिवहन व्यवस्था सुचारु रह सके।

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Author: polkholnewz

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