नरसिंहपुर। 8 जून 2026 जिले की ग्राम पंचायत खिरिया में स्थित लगभग ढाई सौ वर्ष पुराने ऐतिहासिक लक्ष्मीनारायण मंदिर को लेकर एक बार फिर विवाद गहरा गया है। मंदिर की जर्जर होती स्थिति, उससे जुड़ी लगभग 300 एकड़ भूमि और उस पर वर्षों से चले आ रहे कब्जे एवं खरीद-फरोख्त के आरोपों ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ग्राम निवासी राममनोहर शर्मा का आरोप है कि ब्रिटिशकाल में एक दानदाता द्वारा मंदिर के नाम लगभग 300 एकड़ भूमि दान की गई थी। समय के साथ इस भूमि पर कथित रूप से कब्जे हुए, खरीद-फरोख्त हुई और मामला वर्षों तक न्यायालय में विचाराधीन रहा। उनका दावा है कि भूमि से जुड़े प्रकरण में लगभग 27 लोगों द्वारा खरीद-बिक्री किए जाने की बात सामने आई थी।
राममनोहर शर्मा का कहना है कि इतनी बड़ी भूमि होने के बावजूद मंदिर का न तो समुचित जीर्णोद्धार हो सका और न ही इसके संरक्षण के लिए कोई प्रभावी ट्रस्ट व्यवस्था बनाई गई। परिणामस्वरूप आज यह ऐतिहासिक धरोहर उपेक्षा का शिकार होकर जर्जर अवस्था में पहुंच गई है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि वर्तमान में ग्राम पंचायत द्वारा मंदिर परिसर एवं उससे जुड़ी भूमि पर सामुदायिक भवन और अन्य कार्यक्रमों के लिए स्थान विकसित करने की तैयारी की जा रही है, जबकि मंदिर की मूल पहचान और धार्मिक महत्व को नजरअंदाज किया जा रहा है। शर्मा ने ग्राम पंचायत के सरपंच पर भी मंदिर भूमि पर कब्जे से जुड़े गंभीर आरोप लगाए हैं।
हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। संबंधित पक्षों का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
क्या वास्तव में मंदिर की भूमि पर अवैध कब्जे हुए? 300 एकड़ जमीन का वर्तमान रिकॉर्ड क्या कहता है? और आखिर क्यों बदहाल है यह ऐतिहासिक मंदिर? इन सभी सवालों के जवाब जानने के लिए देखिए पोलखोल की विशेष वन-टू-वन रिपोर्ट, ग्राम निवासी राममनोहर शर्मा की जुबानी।
नोट: इस मामले में अभी किसी भी पक्ष का बयान सामने नही आया बयान प्रतिक्षारत् है!








