*कछवादौन बाणगंगा धाम बदहाल!* *मान्यता, महाभारत काल में भीम के* *बाण से निकला था जल, आज सूखा पड़ा पवित्र कुंड..* *प्राचीन गणेश, हनुमान, गरूण और शिव मंदिर उपेक्षा का शिकार*.. *बरहटा से 4-5 किमी दुर्गम रास्ते में स्थित धरोहर तक पहुंचना बारिश में लगभग नामुमकिन..* *मंदिर की 20-25 एकड़ जमीन, फिर* *भी नहीं रखरखाव”, क्षेत्रवासी दिलीप श्रीवास्तव.* *देखिये कछवादौन बाणगंगा धाम की जमीनी हकीकत सिर्फ पोलखोल पर!*

नरसिंहपुर ! 17 मई 2026

नरसिंहपुर जिले के बरहटा से लगभग 4-5 किलोमीटर दूर दुर्गम रास्तों के बीच स्थित कछवादौन बाणगंगा क्षेत्र इन दिनों बदहाली और उपेक्षा का शिकार बना हुआ है।

क्षेत्रवासियों के अनुसार यह स्थान धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता है कि महाभारत काल में वनवास के दौरान भीम ने यहां बाण चलाकर जल निकाला था, तभी से इस स्थान को “बाणगंगा” के नाम से जाना जाने लगा।

मंदिर परिसर में भगवान श्री गणेश का प्राचीन मंदिर स्थित है, जिसके बारे में कहा जाता है कि समय के साथ इसकी आकृति बढ़ती जा रही है। इसके अलावा यहां गरूण मंदिर, हनुमान मंदिर और भगवान शंकर का मंदिर भी मौजूद है। परिसर में प्राचीन पत्थर और कलाकृतियां भी दिखाई देती हैं, जो इस क्षेत्र की ऐतिहासिक महत्ता को दर्शाती हैं।

क्षेत्रवासी दिलीप श्रीवास्तव ने बताया कि मंदिर परिसर की स्थिति बेहद खराब है। यहां पहुंचने का रास्ता जर्जर हो चुका है और बारिश के मौसम में यहां तक पहुंचना लगभग नामुमकिन हो जाता है। उन्होंने यह भी बताया कि मंदिर की लगभग 20 से 25 एकड़ भूमि है, लेकिन इसके रखरखाव की कोई व्यवस्था दिखाई नहीं देती। स्थानीय लोगों का कहना है कि पूरा प्रबंधन कुछ महंतों के हाथ में है, जबकि ट्रस्ट या जिम्मेदार संस्था की जानकारी स्पष्ट नहीं है।

मंदिर में पुजारी भी हर समय उपलब्ध नहीं रहते, जिससे जो कुछ जो श्रद्धालु आते हैं उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ता है। क्षेत्रवासियों ने प्रशासन और जिम्मेदार लोगों से इस प्राचीन धार्मिक धरोहर के संरक्षण और उचित रखरखाव की मांग की है।

देखिये कछवादौन बाणगंगा धाम की जमीनी हकीकत सिर्फ पोलखोल पर।

 

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Author: polkholnewz

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