नरसिंहपुर। 13 मार्च 2026 जिले में तेजी से बढ़ रहे साइबर अपराधों पर लगाम लगाने के लिए नरसिंहपुर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए म्यूल अकाउंट गिरोह का खुलासा किया है। पुलिस जांच में सामने आया है कि जिले में करीब 180 बैंक खातों का उपयोग म्यूल अकाउंट के रूप में किया जा रहा था, जिनके माध्यम से लगभग 15 करोड़ रुपये के अवैध लेन-देन का खुलासा हुआ है।
पुलिस अधीक्षक डॉ. ऋषिकेश मीना को लगातार ऐसी शिकायतें मिल रही थीं कि कुछ लोग भोले-भाले लोगों को लालच देकर उनके बैंक खाते, पासबुक और एटीएम कार्ड हासिल कर रहे हैं। इन खातों का इस्तेमाल ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म, साइबर फ्रॉड और सेक्सटॉर्शन जैसे अपराधों में होने वाले पैसों के लेन-देन के लिए किया जा रहा था।
शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए पुलिस अधीक्षक ने मामले की जांच के लिए एक विशेष टीम का गठन किया। टीम ने तकनीकी साक्ष्यों और बैंक ट्रांजेक्शन की गहन जांच करते हुए संदिग्ध खातों, मोबाइल नंबरों और लेन-देन की कड़ियों को जोड़ा। जांच के दौरान यह सामने आया कि जिले के करीब 180 बैंक खाते म्यूल अकाउंट के रूप में इस्तेमाल किए जा रहे थे, जिनके जरिए साइबर ठगी की रकम को अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर छिपाने का प्रयास किया जाता था।
पुलिस ने कार्रवाई करते हुए अब तक 35 म्यूल अकाउंट बंद कराए हैं और पूरे नेटवर्क की जांच जारी है। इस मामले में पुलिस द्वारा 17 आरोपियों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई करते हुए उन्हें जेल भेजा गया है। आरोपियों के पास से 9 पासबुक, 4 एटीएम कार्ड और 9 मोबाइल फोन भी जब्त किए गए हैं।
पुलिस के अनुसार आरोपी लोगों को छोटे आर्थिक लाभ का लालच देकर उनके बैंक खाते और एटीएम कार्ड ले लेते थे और फिर उन्हीं खातों के माध्यम से साइबर अपराध से प्राप्त राशि का लेन-देन करते थे।
वहीं पुलिस द्वारा पिछले एक वर्ष में साइबर फ्रॉड के मामलों में कार्रवाई करते हुए करीब 45 लाख रुपये की राशि पर होल्ड लगवाया गया, जबकि लगातार प्रयासों के चलते करीब 53 लाख रुपये की राशि पीड़ित खाताधारकों को वापस भी दिलाई गई।
इस पूरे मामले के खुलासे में थाना करेली के निरीक्षक रत्नाकर हिग्वें, थाना स्टेशनगंज के निरीक्षक सौरभ पटेल, थाना गाडरवाड़ा के निरीक्षक अशोक चौहान, रक्षित केंद्र के निरीक्षक किशोर वामनकर सहित पुलिस टीम के अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों की सराहनीय भूमिका रही है।
पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी लालच में आकर अपने बैंक खाते, एटीएम कार्ड या ओटीपी जैसी जानकारी किसी को भी न दें, अन्यथा वे अनजाने में साइबर अपराध का हिस्सा बन सकते हैं।








