नई दिल्ली। 12 मार्च 2026 सुप्रीम कोर्ट के एक अहम फैसले में गाजियाबाद निवासी हरीश राणा को पैसिव यूथेनेशिया (इच्छामृत्यु) की अनुमति दे दी है। अदालत ने उनके लाइफ सपोर्ट सिस्टम को हटाने की मंजूरी देते हुए कहा कि जब किसी मरीज के ठीक होने की कोई संभावना नहीं हो और वह लंबे समय से वेजिटेटिव अवस्था में हो, तो उसे सम्मानजनक मृत्यु का अधिकार मिलना चाहिए।
मिली जानकारी के अनुसार, वर्ष 2013 में एक दुर्घटना के दौरान चौथी मंजिल से गिरने से हरीश राणा को गंभीर ब्रेन इंजरी हो गई थी। इसके बाद से वह करीब 13 वर्षों से कोमा की स्थिति में थे और पूरी तरह जीवनरक्षक उपकरणों के सहारे जीवित थे।
हरीश राणा के माता-पिता ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर बेटे की हालत को देखते हुए इच्छामृत्यु की अनुमति मांगी थी। मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने चिकित्सा स्थिति और परिवार की पीड़ा को ध्यान में रखते हुए लाइफ-सस्टेनिंग ट्रीटमेंट हटाने की अनुमति दे दी।
पैसिव यूथेनेशिया का अर्थ है कि मरीज को जीवित रखने वाले कृत्रिम इलाज या लाइफ सपोर्ट सिस्टम को बंद कर दिया जाए, जिससे उसकी प्राकृतिक मृत्यु हो सके। भारत में यह प्रक्रिया विशेष परिस्थितियों और न्यायालय की अनुमति के बाद ही संभव है।
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को पैसिव यूथेनेशिया से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों में माना जा रहा है।








