

नरसिंहपुर। 6 जनवरी 2026
व्यावसायिक वाहनों की फिटनेस जांच को लेकर केंद्र सरकार के निर्णय के बाद वाहन संचालकों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। अब तक जिला परिवहन कार्यालय में होने वाली फिटनेस जांच की सुविधा बंद कर दी गई है, जिससे बस, ट्रक और अन्य व्यावसायिक वाहन मालिकों को फिटनेस सर्टिफिकेट के लिए जबलपुर स्थित ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन (एटीएस) जाना अनिवार्य हो गया है।
इस बदलाव का सीधा असर वाहन संचालकों की जेब पर पड़ रहा है। जहां पहले फिटनेस प्रमाण पत्र मात्र 1000 रुपये में बन जाता था, वहीं अब जबलपुर तक वाहन ले जाने, डीजल, जांच शुल्क और समय की लागत जोड़कर करीब 9 से 11 हजार रुपये तक खर्च आ रहा है। इससे छोटे और मध्यम वाहन संचालकों पर आर्थिक बोझ बढ़ गया है।
जिला परिवहन कार्यालय के अंतर्गत प्रतिमाह लगभग 180 से 200 व्यावसायिक वाहनों की फिटनेस जांच होती थी, लेकिन नए नियमों के बाद यह प्रक्रिया जिले में संभव नहीं रही। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा जारी निर्देश के अनुसार प्रदेश के 42 जिलों में जिला स्तर पर फिटनेस जांच बंद कर दी गई है और अब यह कार्य केवल एटीएस मशीनों के माध्यम से ही किया जाएगा।
वाहन संचालकों का कहना है कि जबलपुर जाना न सिर्फ महंगा, बल्कि समय लेने वाला भी है, जिससे व्यवसाय प्रभावित हो रहा है। वहीं परिवहन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि नई व्यवस्था से फिटनेस जांच अधिक पारदर्शी और तकनीकी रूप से सटीक होगी, लेकिन फिलहाल इसके कारण वाहन मालिकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।








