नरसिंहपुर की पावन धरती पर विराजमान विघ्नहर्ता श्री गणेश क्षमा, करुणा और सद्बुद्धि के प्रतीक हैं। उनकी शरण में आने से मन को शांति मिलती है, यह सत्य है।
लेकिन बप्पा यही भी सिखाते हैं कि भक्ति के साथ कर्तव्य निभाना अनिवार्य है।
कहानियाँ गढ़ने से नहीं, कर चुकाने से शहर चलता है।
🙏मंदिर में हाथ जोड़ने से पहले यदि कर का दायित्व निभा दिया जाए, तो वह भी सेवा ही मानी जाएगी।
नरसिंहपुर के जनप्रतिनिधियों, प्रशासन, शासन और उन सभी सम्मानित नागरिकों से विनम्र लेकिन स्पष्ट आग्रह है, जिनका कर अब भी बाकी है, वे विलंब न करें।🙏
बप्पा सभी को माफ कर सकते हैं, पर नगर की व्यवस्था लापरवाही नहीं झेलती।
आइए, सद्बुद्धि लें, जिम्मेदारी निभाएँ और अपनी पवित्र धरती नरसिंहपुर को संवारने में सहभागी बनें।
जय श्री गणेश 🙏








