होली पर ‘हड़ताल की हुंकार’ या किराये की मार से बचने की चाल? शासकीय बसों की वापसी से क्यों घबराए निजी ऑपरेटर?

नरसिंहपुर/भोपाल। 24 फरवरी 2026 प्रदेश में प्रस्तावित शासकीय बस संचालन को लेकर जहां निजी बस ऑपरेटर अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी दे रहे हैं, वहीं इस पूरे घटनाक्रम को एक अलग नजरिये से भी देखा जा रहा है। सवाल उठ रहा है कि अगर सरकार शासकीय बसें चलाती है तो इससे आम जनता को राहत ही मिलेगी फिर विरोध किस बात का?

दरअसल, त्योहारों के सीजन विशेषकर होली, दीपावली और शादी-ब्याह के समय निजी बस ऑपरेटरों द्वारा मनमाने किराये वसूलने की शिकायतें लंबे समय से सामने आती रही हैं। यात्रियों का आरोप है कि मांग बढ़ते ही किराया दोगुना-तीन गुना तक कर दिया जाता है। ऐसे में यदि शासकीय बसों का संचालन शुरू होता है, तो किराया नियंत्रण में रहेगा और गरीब व मध्यम वर्गीय यात्रियों को सीधी राहत मिलेगी।

➡️ करीब बीस वर्षों बाद मध्यप्रदेश की सड़कों पर पुनः शासकीय बसें चलने की संभावना बन रही है। जानकारों का मानना है कि इससे न केवल किराया संतुलित रहेगा, बल्कि दूरदराज के ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों को भी बेहतर परिवहन सुविधा मिल सकेगी।

➡️ इसी बीच निजी बस संचालकों ने 2 मार्च से हड़ताल पर जाने का ऐलान किया है, जो होली जैसे बड़े त्योहार के ठीक पहले प्रभावी हो सकता है। आलोचकों का कहना है कि प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में सड़क मार्ग ही मुख्य यातायात का साधन है, ऐसे में हड़ताल का सीधा असर आम जनता पर पड़ेगा।

🗣️ सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या त्योहार के समय दबाव बनाकर सरकार पर निर्णय बदलवाने की कोशिश की जा रही है? क्योंकि परिवहन व्यवस्था ठप होने की स्थिति में सबसे ज्यादा परेशानी आम यात्रियों को ही झेलनी पड़ेगी।

➡️ अब देखना यह है कि सरकार जनता के हित को प्राथमिकता देते हुए शासकीय बस संचालन की दिशा में कदम बढ़ाती है या निजी बस ऑपरेटरों के दबाव के आगे झुकती है।

(पोलखोल नजरिया)  क्या यह हड़ताल जनहित में है, या फिर वर्षों से चले आ रहे एकाधिकार को बचाने की कवायद?

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Author: polkholnewz

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