नरसिंहपुर | 11 अक्टूबर 2026 पोलखोल विशेष रिपोर्ट
नरसिंहपुर जिले में पटवारियों के कथित तौर पर लापता होने, तहसील कार्यालय में देर रात हुए घटनाक्रम और अब दो मीडियाकर्मियों को रुपये दिए जाने के मामले ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पटवारी संघ के जिला अध्यक्ष राहुल पटैल की भूमिका अब चर्चा के केंद्र में है। सवाल यह है कि जिस मामले को लेकर पटवारियों के हितों की आवाज उठाई जा रही थी, उसमें मीडिया कर्मियों को रुपये देने की जरूरत आखिर क्यों पड़ी?
पोलखोल ने हमेशा निष्पक्षता के साथ उठाई आवाज
पोलखोल न्यूज़ का कहना है कि चैनल ने हमेशा किसानों, सफाईकर्मियों, पटवारियों और आम नागरिकों से जुड़े मुद्दों को बिना किसी स्वार्थ और लेन-देन के निष्पक्षता से उठाया है। लगभग पंद्रह दिन पहले भी परिवीक्षाधीन पटवारियों की नीतिगत समस्याओं को प्रमुखता से दिखाया गया था। शुक्रवार को भी लापता बताए जा रहे महिला और पुरुष पटवारियों के मामले में पटवारी संघ अध्यक्ष राहुल पटैल के फोन पर ही पोलखोल की टीम मौके पर पहुंची थी।
रात करीब पौने दस बजे आया फोन, तहसील कार्यालय पहुंचे पत्रकार
शुक्रवार रात करीब 9:45 बजे राहुल पटैल का फोन आया। उन्होंने तहसील कार्यालय में पटवारियों को कथित तौर पर बंधक बनाए जाने की बात कहते हुए तत्काल पहुंचने को कहा। सूचना पर पोलखोल की टीम पुराने एसपी कार्यालय में संचालित अस्थायी तहसील कार्यालय पहुंची, जहां तहसीलदार विक्रम ठाकुर सहित कुछ लोग मौजूद थे।
मौके पर बहस शुरू हुई। इसी दौरान एक व्यक्ति के ऊपर कार्यालय की ओर जाने और कथित तौर पर गाली-गलौज करने की बात सामने आई। स्थिति बिगड़ने की आशंका देखते हुए पोलखोल ने पहले ही कोतवाली थाना प्रभारी गौरव चाटे को फोन पर सूचना देकर पुलिस बल भेजने का अनुरोध किया। पुलिस के पहुंचने के बाद ही टीम ऊपर गई और घटनाक्रम की जानकारी लेकर संबंधित पक्षों के बयान प्रसारित किए।
रात करीब 12:30 बजे पोलखोल ने राहुल पटैल का बयान प्रसारित किया। इसके बाद नीचे उतरते समय वे पटवारी भी मिल गए, जिन्हें लापता बताया जा रहा था। उनका पक्ष लेकर भी खबर चलाई गई।
सामने आए घटनाक्रम में अपहरण जैसी बातों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी। राहुल पटैल ने तीन तहसीलदारों—अनु, अमित और विक्रम—को लेकर जो आरोप लगाए थे, उन पर संबंधित अधिकारियों का पक्ष भी महत्वपूर्ण था।
महिला पटवारी की पहचान सुरक्षित रखने के लिए राहुल पटैल के अनुरोध और परिजनों की कथित इच्छा के आधार पर वीडियो से उनका नाम हटा दिया गया। पोलखोल का कहना है कि महिला की निजता और सम्मान को ध्यान में रखकर यह निर्णय लिया गया।
रविवार को सामने आई रुपये देने की जानकारी
रविवार सुबह पोलखोल को एक विश्वसनीय सूत्र के माध्यम से जानकारी मिली कि कथित तौर पर दो मीडियाकर्मियों को ₹2,000-₹2,000 दिए गए थे। सूत्र ने इस लेन-देन को एक वरिष्ठ पटवारी के कहने पर किए जाने की बात बताई। इस जानकारी की पुष्टि के लिए पोलखोल ने राहुल पटैल से संपर्क किया।
बाद में सुभाष पार्क के मुख्य द्वार पर हुई मुलाकात में राहुल पटैल ने कथित तौर पर स्वीकार किया कि उन्होंने एक वरिष्ठ पटवारी साथी के कहने पर दो मीडियाकर्मियों को दो-दो हजार रुपये दिए थे। उनके बताए अनुसार, संबंधित मीडियाकर्मियों ने कहा था कि वे और मुरैना के उनके एक अन्य पटवारी साथी तहसीलदारों के साथ अभद्रता और गाली-गलौज कर रहे थे।
हालांकि, इस कथित लेन-देन की स्वतंत्र पुष्टि और रुपये प्राप्त करने वाले दोनों मीडियाकर्मियों का पक्ष सामने आना अभी आवश्यक है। यह भी स्पष्ट होना बाकी है कि रुपये किस उद्देश्य से दिए गए, क्या इसके पीछे कोई विशेष शर्त थी और क्या इस लेन-देन का खबरों के प्रसारण से कोई संबंध था।
राहुल पटैल ने क्या कहा?
मुलाकात के दौरान राहुल पटैल ने कहा कि वे अध्यक्ष नहीं रहना चाहते और अपनी नौकरी करना चाहते हैं। उन्होंने अभद्रता के आरोपों के संदर्भ में कहा कि अभद्रता उनके एक साथी पटवारी ने की थी, उन्होंने नहीं।
पोलखोल की ओर से उनसे सवाल किया गया कि यदि वे संघ के अध्यक्ष हैं, तो पूरे घटनाक्रम में उनकी जिम्मेदारी क्या थी और दो मीडियाकर्मियों को रुपये देने की आवश्यकता क्यों पड़ी? बातचीत के बाद राहुल पटैल वहां से चले गए।
अब सबसे बड़े सवाल
यदि दो मीडियाकर्मियों को रुपये दिए गए, तो आखिर किस उद्देश्य से दिए गए?
क्या यह केवल आपसी लेन-देन था या किसी खबर, बयान अथवा घटनाक्रम से इसका कोई संबंध था?
क्या पटवारी संघ के अन्य सदस्यों को इस कथित लेन-देन की जानकारी थी?
क्या संघ के अध्यक्ष होने के नाते राहुल पटैल को पूरे मामले की जिम्मेदारी स्पष्ट नहीं करनी चाहिए?
यदि अभद्रता किसी अन्य पटवारी ने की थी, तो पूरे घटनाक्रम में राहुल पटैल की भूमिका क्या थी?
क्या इस मामले में संबंधित तहसीलदारों, दोनों मीडियाकर्मियों और वरिष्ठ पटवारी का पक्ष सामने आएगा?
पोलखोल का स्पष्ट पक्ष
पोलखोल न्यूज़ का कहना है कि चैनल किसी व्यक्ति के खिलाफ पूर्वाग्रह से खबर नहीं चलाता। यदि किसी पक्ष पर आरोप हैं, तो उसका जवाब भी जनता के सामने आना चाहिए। तहसीलदारों का पक्ष उपलब्ध होने पर उसे भी निष्पक्षता से प्रकाशित किया जाएगा। इसी तरह, राहुल पटैल, संबंधित दोनों मीडियाकर्मियों और वरिष्ठ पटवारी को भी अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया जाना चाहिए।
जनता जानना चाहती है—पटवारी संघ की लड़ाई कर्मचारियों के अधिकारों की है या इस पूरे घटनाक्रम में कुछ और भी है?
फिलहाल सबसे अहम सवाल यही है कि दो मीडियाकर्मियों को रुपये किस उद्देश्य से दिए गए और इस लेन-देन की वास्तविकता क्या है? इन सवालों के जवाब सामने आना जरूरी है।
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