नरसिंहपुर/करेली। 6 अक्टूबर 2026 ग्राम पंचायत खमरिया (रीछई) में कथित आर्थिक अनियमितताओं को लेकर दो ग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायतकर्ता रघुराज मेहरा और जगन्नाथ पटेल ने मुख्यमंत्री के नाम दिए आवेदन में पंचायत के सरपंच एवं सचिव सहित संबंधित जिम्मेदारों के कार्यों की स्वतंत्र एवं उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि पंचायत में विकास कार्यों के लिए स्वीकृत शासकीय राशि में कथित तौर पर अनियमितता की गई है। उन्होंने करीब 90 लाख रुपये के कथित गबन की जांच कराने की मांग उठाई है। इसके अलावा अपात्र लोगों को योजनाओं का लाभ दिलाने, पात्र लोगों को योजनाओं के लाभ से वंचित करने तथा शासकीय भूमि पर अतिक्रमण के मामलों में संरक्षण दिए जाने जैसे आरोप भी आवेदन में लगाए गए हैं।
शिकायतकर्ताओं के अनुसार, उन्होंने पूर्व में भी विभिन्न स्तरों पर शिकायतें एवं जनसुनवाई में आवेदन दिए हैं। उनका कहना है कि शिकायतों के संबंध में अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। वहीं, पंचायत से संबंधित दस्तावेज प्राप्त करने के लिए आरटीआई के माध्यम से भी जानकारी मांगी गई है।
इन दस्तावेजों की जांच की मांग
आवेदन में शिकायतकर्ताओं ने पंचायत के विकास कार्यों से जुड़े माप पुस्तिका (एमबी), प्रशासकीय एवं तकनीकी स्वीकृति, वर्क ऑर्डर/अनुबंध, मनरेगा मस्टररोल एवं जॉब कार्ड, सामग्री खरीदी और वेंडर संबंधी रिकॉर्ड, पंचायत परिसंपत्ति रजिस्टर, योजनाओं की ऑनलाइन प्रविष्टियां, जियो-टैग फोटो तथा निरीक्षण एवं जांच प्रतिवेदन की जांच कराने की मांग की है।
शिकायत में यह भी जांचने की मांग की गई है कि कहीं किसी पुराने निर्माण कार्य को नया कार्य दर्शाकर दोबारा भुगतान तो नहीं किया गया तथा वास्तविक कार्य की मात्रा और गुणवत्ता की तुलना में अधिक राशि का भुगतान तो नहीं हुआ।
शिकायतकर्ताओं ने 6 अक्टूबर 2022 से 1 अगस्त 2026 तक की अवधि के पंचायत के कार्यों की स्वतंत्र जांच कराने और यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित सरपंच, सचिव, इंजीनियर, वेंडर एवं अन्य जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई के साथ शासकीय राशि की वसूली की मांग की है।
हालांकि, आवेदन में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। मामले में संबंधित सरपंच, सचिव एवं अन्य पक्षों का पक्ष सामने आना और सक्षम जांच एजेंसी की रिपोर्ट महत्वपूर्ण होगी।
खमरिया पंचायत में लगाए गए इन गंभीर आरोपों में आखिर कितनी सच्चाई है?
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