नरसिंहपुर ! 30 जुलाई 2026
गाडरवारा। गाडरवारा न्यायालय में राजस्व विभाग से जुड़े कथित फर्जीवाड़े और सरकारी अभिलेखों में कूटरचना के आरोपों से संबंधित एक मामला न्यायिक प्रक्रिया में पहुंच गया है। ग्राम बरहेटा निवासी हिमाचल कौरव द्वारा दायर आपराधिक परिवाद पर न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (JMFC), गाडरवारा ने प्रारंभिक साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद प्रकरण को विचारण में लेते हुए आरोपित पक्ष को नोटिस जारी करने का आदेश दिया है।
परिवाद में तत्कालीन तहसीलदार प्रियंका नेताम, हल्का पटवारी चैतन्य विश्वकर्मा एवं किसान बुद्धा को आरोपी बनाया गया है।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि ग्राम बरहेटा स्थित एक भूमि के सीमांकन प्रकरण से संबंधित शासकीय राजस्व अभिलेखों में कथित रूप से फेरबदल कर बाद में अतिरिक्त टिप्पणियां जोड़ी गईं, जिससे रिकॉर्ड की मूल प्रकृति बदल गई और एक पक्ष को अनुचित लाभ पहुंचाने का प्रयास किया गया।
परिवाद के अनुसार वर्ष 2023 और वर्ष 2024 में प्राप्त एक ही सीमांकन प्रकरण की प्रमाणित प्रतियों की तुलना करने पर कई महत्वपूर्ण अंतर सामने आए। शिकायतकर्ता का दावा है कि बाद में जोड़ी गई टिप्पणियों के माध्यम से यह दर्शाने का प्रयास किया गया कि संबंधित भूमि पर उनका अवैध कब्जा था, जबकि पहले प्राप्त प्रमाणित अभिलेखों में ऐसा कोई उल्लेख नहीं था।
शिकायतकर्ता का यह भी आरोप है कि राजस्व रिकॉर्ड में कथित छेड़छाड़ संबंधित अधिकारियों की मिलीभगत से की गई। उन्होंने बताया कि इस संबंध में पुलिस, राजस्व विभाग, कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक सहित अन्य सक्षम अधिकारियों को कई बार लिखित शिकायतें दी गईं, लेकिन कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं होने पर उन्हें न्यायालय की शरण लेनी पड़ी।
न्यायालयीन अभिलेखों के अनुसार 14 मई 2026 को परिवाद प्रस्तुत किया गया था। इसके बाद 9 जुलाई 2026 को परिवादी के प्रारंभिक साक्ष्य दर्ज किए गए। साक्ष्यों के परीक्षण के बाद न्यायालय ने प्रथम दृष्टया कार्यवाही करते हुए आरोपित पक्ष को नोटिस जारी करने का आदेश पारित किया। 23 जुलाई 2026 के आदेश में नोटिस तामील कराने की प्रक्रिया का भी उल्लेख किया गया है।
परिवाद में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के प्रावधानों के तहत कार्रवाई की मांग की गई है।
महत्वपूर्ण: यह मामला वर्तमान में न्यायालय में विचाराधीन है। न्यायालय ने अभी केवल परिवाद पर प्रथम दृष्टया संज्ञान लेकर नोटिस जारी करने की प्रक्रिया प्रारंभ की है। आरोपों की सत्यता अथवा आरोपितों की जिम्मेदारी का अंतिम निर्णय दोनों पक्षों की सुनवाई और उपलब्ध साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही न्यायालय द्वारा किया जाएगा।










