नरसिंहपुर। 6 अगस्त 2026 गोटेगांव थाना क्षेत्र में 8 वर्षीय मासूम बच्ची के साथ हुए जघन्य अपराध और हत्या के मामले में पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। लेकिन इस पूरे घटनाक्रम के बीच एक और गंभीर पहलू सामने आया है। कुछ लोगों ने, जो स्वयं को कथित रूप से “बुद्धिजीवी” और समाज का जिम्मेदार नागरिक बताते हैं, उन्होंने सोशल मीडिया पर बच्ची की फोटो, पहचान और अन्य निजी जानकारी सार्वजनिक कर दी।
इस मामले को लेकर पुलिस अधीक्षक डॉ. ऋषिकेश मीना ने आज हुई प्रेस वार्ता में नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी दुष्कर्म, लैंगिक अपराध या संवेदनशील मामले में पीड़िता की पहचान उजागर करना कानून का उल्लंघन है और यह उसकी निजता पर गंभीर हमला भी है।
सोचने वाली बात यह है कि क्या यह केवल कानूनी जानकारी का अभाव है या फिर सोशल मीडिया पर लाइक, व्यूज़ और टीआरपी की अंधी दौड़? किसी मासूम की पहचान सार्वजनिक कर देना न केवल अमानवीय है, बल्कि कानून की नजर में भी दंडनीय कृत्य है।
यह कोई पहला मामला नहीं है। महिलाओं, बच्चियों और अन्य संवेदनशील अपराधों से जुड़े मामलों में पीड़ित की पहचान, फोटो, परिवार, गांव, मोहल्ला या ऐसी कोई भी जानकारी साझा नहीं की जा सकती, जिससे उसकी पहचान उजागर हो। इसके बावजूद कुछ लोग बिना जिम्मेदारी के ऐसे फोटो और विवरण प्रसारित कर रहे हैं।
पत्रकारिता और सोशल मीडिया का उद्देश्य समाज को जागरूक करना है, न कि पीड़ित की गरिमा और निजता को तार-तार करना। ऐसे मामलों में प्रत्येक नागरिक, पत्रकार और सोशल मीडिया उपयोगकर्ता की नैतिक एवं कानूनी जिम्मेदारी है कि वह पीड़ित की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखे।
पोलखोल न्यूज़ की अपील: किसी भी संवेदनशील अपराध की खबर साझा करते समय कानून का सम्मान करें और पीड़ित की निजता की रक्षा करें। एक छोटी-सी लापरवाही किसी पीड़ित परिवार के घावों को और गहरा कर सकती है।








