“सम्मान भी… और सवाल भी: क्या पुलिस की कार्यप्रणाली में संतुलन जरूरी नहीं?”

नरसिंहपुर! 25 फरवरी 2026

एक ओर प्रदेश मुख्यालय से जारी आदेशों में पुलिस कर्मियों को जनप्रतिनिधियों को सैल्यूट करने के निर्देश चर्चा का विषय बने हुए हैं, तो दूसरी ओर पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर आमजन में कई तरह के प्रश्न भी उठ रहे हैं।

हाल ही में कैलाश मकवाणा (पुलिस महानिदेशक, मध्यप्रदेश) द्वारा नरसिंहपुर की उस टीम को सम्मानित किया गया, जिसने होटल कुसुम वैली में हुई लगभग 75 लाख रुपये की लूट का खुलासा मात्र 6 घंटे में कर 7 आरोपियों को गिरफ्तार कर 68 लाख रुपये बरामद किए। त्वरित कार्रवाई के लिए टीम को प्रशंसा पत्र और नगद पुरस्कार दिया गया, यह निश्चित रूप से सराहनीय उपलब्धि है।

लेकिन यहीं से बहस भी शुरू होती है।
नरसिंहपुर जिले के कुछ पुराने मामलों को लेकर आमजन में असंतोष बना हुआ है। वर्ष 2021 में कोरोना काल मे स्टेशन थाना अंतर्गत हुई आशुतोष चौबे की मौत के मामले में परिजन आज भी इसे हत्या बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। वहीं गोटेगांव थाना क्षेत्र के ग्राम नोन पिपरिया में मुरारी साहू की मौत को लेकर भी परिजन लगातार उच्च स्तर पर आवेदन देकर मामले की जांच की मांग कर चुके हैं। इन दोनों मामलों में पुलिस द्वारा दुर्घटना मानकर विवेचना किए जाने को लेकर स्थानीय स्तर पर सवाल उठते रहे हैं। आम लोगों का कहना है कि जहां बड़े मामलों में तेज़ कार्रवाई और सम्मान देखने को मिलता है, वहीं कुछ गंभीर मामलों में तथ्यों की गहराई तक जांच को लेकर संतोषजनक पारदर्शिता दिखाई नहीं देती।

जनता का प्रश्न सीधा है
क्या पुलिस की सक्रियता हर मामले में समान रूप से दिखाई देनी चाहिए या केवल चुनिंदा मामलों में?

सम्मान मिलना गर्व की बात है, लेकिन भरोसा मिलना उससे भी बड़ी बात है।
यदि पुलिस विभाग अपनी तेज़ कार्रवाई की क्षमता को हर संवेदनशील मामले में समान गंभीरता से लागू करे, तो न केवल सम्मान बढ़ेगा बल्कि जनता का विश्वास भी और मजबूत होगा।

🗣️ आज आवश्यकता है..
✔ निष्पक्षता की
✔ पारदर्शिता की
✔ और जवाबदेही की

➡️ क्योंकि अंततः पुलिस व्यवस्था का सबसे बड़ा पुरस्कार जनता का विश्वास ही है।

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Author: polkholnewz

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