नरसिंहपुर / 5 दिसंबर 2025
दो आरोपी गिरफ्तार, भारी मात्रा में “Not for Sale” नशीले इंजेक्शन बरामद, लेकिन कई सवाल अभी भी अनुत्तरित 🤔
नरसिंहपुर पुलिस ने ज़िले में अवैध नशीली दवाओं के विरुद्ध चल रहे “OPERATION EAGLE CLAW” 🦅 के तहत बड़ी कार्यवाही करते हुए दो व्यक्तियों को गिरफ्तार किया है।
पुलिस के अनुसार दोनों आरोपियों से क्लोरफेनिरामाइन मेलीवट एवं फेनिरामाइन मेलीवट इंजेक्शन की 60 शीशियाँ, बड़ी मात्रा में सिरिंज और नीडल्स बरामद की गई हैं। यह कार्रवाई ज़िले में लगातार बढ़ रहे नशे के मामलों के बीच पुलिस की सक्रियता का संकेत देती है!
लेकिन, बरामद इंजेक्शनों पर लिखा “NOT FOR SALE” पूरे मामले को कहीं अधिक गंभीर बना देता है… और कई चुभते हुए सवाल खड़े करता है।
क्या बरामद इंजेक्शन सरकारी अस्पताल से गायब हुए थे?
👉 पोलखोल ने पिछले महीने 8 नवंबर को जिला अस्पताल से इंजेक्शन-सिरिंज चोरी की खबर प्रमुखता से प्रकाशित की थी। उस खबर में स्पष्ट था कि एक युवक चाइल्ड वार्ड में घुसकर सिरिंज चुराने की कोशिश करता है, पकड़ा जाता है और फिर पुलिस से उलझकर भाग निकलता है।
🗣️ अब सवाल यह है..
क्या वर्तमान में पकड़े गए युवकों के पास मिले इंजेक्शन, उसी चोरी का हिस्सा थे?
या फिर?
क्या जिला अस्पताल से “लीक” हो रहा स्टॉक किसी नेटवर्क के जरिए बाहर बेचा जा रहा है?
क्योंकि:
💉 बरामद इंजेक्शनों पर “Not for Sale” लिखा है, यानी यह बाज़ार में बिकने वाला सामान्य मेडिकल स्टॉक नहीं है।
एक निजी डॉक्टर ने पोलखोल से बातचीत में स्पष्ट कहा कि ये इंजेक्शन जिला अस्पताल में मरीजों को दिए जाने वाले एंटी-एलर्जिक इंजेक्शन हैं।
ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि..
👨🔬 यह सरकारी स्टॉक आखिर आरोपियों के हाथ पहुँचा कैसे?
👮♂️ पुलिस की कार्रवाई, तेज़, लेकिन अधूरी जानकारी?
पुलिस ने प्रेस नोट जारी कर गिरफ्तारी और जब्ती की जानकारी तो दी,
लेकिन..
इंजेक्शन कहाँ से आए?
क्या यह सरकारी अस्पताल की चोरी का मामला है?
क्या किसी प्राइवेट मेडिकल से खरीद की गई?
क्या कोई अंदरूनी सप्लाई चेन काम कर रही है?
क्या ज़िला अस्पताल का स्टॉक वेरिफिकेशन कराया गया?
क्या यह एक बड़े नेटवर्क की कड़ी पकड़ने का मौका था?
इनमें से किसी भी सवाल का जवाब प्रेस नोट में नहीं है।
और सबसे अहम.. 👎
इतनी बड़ी बरामदगी के बावजूद प्रेस कॉन्फ़्रेंस क्यों नहीं की गई?
क्या केस को जल्दबाज़ी में सिर्फ “रूटीन कार्रवाई” की तरह निपटा दिया गया?
🧑🤝🧑 दोनों गिरफ्तार आरोपी
अजय महोबिया, निवासी गणेश नगर, बरगी कॉलोनी
सुरेंद्र उर्फ छुट्टन रजक, निवासी काछी मोहल्ला, शंकर वार्ड
दोनों पर
धारा 5/13 म.प्र. ड्रग कंट्रोल एक्ट एवं 331(4), 305(e) BNS
के तहत मामला दर्ज किया गया है।
🦅 ऑपरेशन ईगल क्लॉ, उद्देश्य तो मजबूत, लेकिन निष्पादन पर सवाल
अभियान का लक्ष्य युवा पीढ़ी को नशे से दूर रखना और अवैध सप्लाई चेन तोड़ना है। अब तक शराब और मादक पदार्थों की कई जब्तियाँ भी की गई हैं।
लेकिन इस घटना ने यह भी सामने लाया है कि..
यदि सरकारी अस्पतालों से ही नशीली दवाओं का स्टॉक बाहर बह रहा है, तो लड़ाई कहीं ज्यादा गहरी है।
🗣️ चेतावनी, यह सिर्फ अपराध नहीं, सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट भी है
ऐसे इंजेक्शनों का गलत इस्तेमाल.. 🔺
एचआईवी/एड्स
गंभीर संक्रमण
नसों का नुकसान
हृदय, लिवर, किडनी फेलियर
और ओवरडोज़ से मौत
तक का खतरा पैदा करता है।
🫵 यानी सरकारी स्टॉक की चोरी केवल कानून तोड़ना नहीं, यह सैकड़ों युवाओं की जान जोखिम में डालने वाला अपराध है।
🗣️ अब ज़िले में गूंजता एक ही सवाल..
“नशे का यह इंजेक्शन नेटवर्क कहाँ से शुरू होता है… और कहाँ खत्म होता है?”
जवाब पुलिस के पास होना चाहिए,
क्योंकि इस बार मामला सिर्फ दो आरोपियों की गिरफ्तारी का नहीं..
बल्कि एक पूरे सिस्टम की पारदर्शिता का है।
Sourabh pratap singh rathore..












