नरसिंहपुर / 9 नवंबर 2025
नरसिंहपुर जिले में नवागत एसपी लगातार अवैध शराब–नशा तस्करों पर कार्रवाई कर रहे हैं। यह सराहनीय है, पर जमीनी वास्तविकता इससे उलट एक गंभीर तस्वीर खड़ी कर रही है, नशा रोकथाम लगभग शून्य और इसका सबसे बड़ा उदाहरण बन चुका है जिला अस्पताल। यहां हालात ऐसे हैं कि लगता है लोग इलाज कराने नहीं, बल्कि नशा करने आते हों।
7 नवंबर को दो चौंकाने वाली घटनाएं सामने आईं..
पहली, कचहरी रोड पर एक युवक नशे में धुत होकर दोपहिया वाहन चलाते हुए लोगों की जान जोखिम में डालता घूमता रहा।
दूसरी, जिला अस्पताल के चाइल्ड वार्ड में एक नशेड़ी युवक घुस गया और सिरिंज चोरी करने लगा। सुरक्षा व्यवस्था की पोल वहीं खुल गई। महिला स्टाफ ने उसे पकड़कर पुलिस को सौंपा, लेकिन अस्पताल चौकी की पुलिस को चुनौती देकर वह भाग निकला।
अब तीसरी और इससे भी चौंकाने वाली घटना सामने आई है…
ट्रॉमा सेंटर में भर्ती मरीज हाथ में अंग्रेजी शराब की बोतल छुपाकर ले गया और शराब पीने की तैयारी करते पकड़ लिया गया।
डॉक्टर ने पर्ची देखकर मरीज को भर्ती कर लिया। इलाज भी शुरू कर दिया। लेकिन स्टाफ की नजर जब पड़ी, तो वहीं अस्पताल बेड पर बैठा मरीज शराब की बोतल खोल रहा था, तभी वहां मौजूद स्टाफ की नजर मरीज पर पड़ी और पुलिस को सूचना दी!
सूचना पर अस्पताल चौकी पुलिस पहुंची और उसे चौकी ले गई। लेकिन यहां भी शर्मनाक नजारा, वह व्यक्ति पुलिस चौकी में ही शराब की बोतल हाथ में लेकर फोटो खिंचवाता रहा।
सभी सवाल अस्पताल से ही क्यों निकल रहे हैं?
• कोई नशेड़ी वार्ड में घुसकर सिरिंज चुरा लेता है!
• कोई शराब की बोतल लेकर बेड पर बैठ जाता है,!
• कोई चौकी पुलिस को गालियां देकर भाग जाता है!
अस्पताल जिम्मेदारों की लापरवाही
• घायल मरीजों और स्टाफ की सुरक्षा भगवान भरोसे..
• डिटेक्टर मशीनें नहीं होना..
• सिर्फ दो- चार गार्डों के सहारे पूरा अस्पताल..
🗣️ चौकी पुलिस की लापरवाही..
अस्पताल चौकी पुलिस क्या सिर्फ चौकी में बैठने के लिए है?
• राउंड क्यों नहीं लगाए जाते?
• 112 अस्पताल में तैनात क्यों नहीं रहती?
• हत्या जैसी गंभीर घटना के बाद भी
सिस्टम क्यों नहीं चेता?
• न शराबियों को डर, न नशाखोरों को, न अपराधियों को, आखिर पुलिस किससे डर रही है?
नरसिंहपुर का जिला अस्पताल इलाज का केंद्र है या फिर मयखाना?
यह सिर्फ सवाल नहीं, एक चेतावनी है,एक दिन कोई बड़ी घटना पूरे सिस्टम को कठघरे में खड़ा कर देगी।
सिस्टम को झकझोरने का समय आ चुका है।








