पुलिस आरोपियों को सजा दिलाकर समाज में स्वच्छ व भयमुक्त वातावरण का निर्माण करें – प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश जिला स्तरीय विधिक दक्षता संवर्धन कार्यशाला संपन्न, अदालत–प्रशासन–पुलिस के बीच समन्वय पर जोर

नरसिंहपुर, 6 नवंबर 2025।

जिला कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में बुधवार 5 नवंबर को आयोजित जिला स्तरीय विधिक दक्षता संवर्धन कार्यशाला में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश अखिलेश शुक्ला ने कहा कि पुलिस का प्रमुख दायित्व है कि जिले में कानून व्यवस्था मजबूत रहे और पीड़ित को न्याय मिले। उन्होंने कहा कि पुलिस की सक्षम एवं पारदर्शी विवेचना से ही आरोपियों को सजा सुनिश्चित हो सकती है, जिससे समाज में स्वच्छ, न्यायपूर्ण और भयमुक्त वातावरण का निर्माण होता है।

कार्यशाला में विशेष न्यायाधीश अमित रंजन समाधिया, नीतिराज सिसोदिया, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट राकेश सनोड़िया, कलेक्टर रजनी सिंह, पुलिस अधीक्षक डॉ. ऋषिकेश मीणा, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक संदीप भूरिया सहित पुलिस विभाग के अधिकारी–कर्मचारी उपस्थित थे।

 

विवेचना में शून्य त्रुटि का लक्ष्य रखें – प्रधान न्यायाधीश

न्यायाधीश शुक्ला ने कहा कि..

पुलिस किसी भी प्रकरण की प्रारंभिक जांच से ही गंभीरता बरते।

सभी सबूत, दस्तावेज और तथ्य विधि सम्मत तरीके से संलग्न करें।

एससी-एसटी एक्ट, महिला, बालक एवं पारिवारिक प्रकरणों में पूर्ण पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखें।

वाहन दुर्घटना प्रकरणों में वाहन का नंबर–नाम, मेडिकल रिपोर्ट, वाहन की क्षति की फोटो आदि अनिवार्य रूप से जोड़ी जाएं।

उन्होंने कहा कि जब पुलिस की विवेचना में मजबूती होगी और आरोपी कानून से नहीं बच पाएंगे, तब न्याय की प्रक्रिया में लोगों का विश्वास और भी गहरा होगा।

 

कलेक्टर और एसपी ने भी रखे विचार

कलेक्टर रजनी सिंह ने कहा कि इस कार्यशाला का उद्देश्य कानून-व्यवस्था को मजबूत करना और न्याय सुनिश्चित करना है। जब पीड़ित को न्याय और अपराधी को सजा मिलेगी तो अपराधों में स्वतः कमी आएगी।

पुलिस अधीक्षक डॉ. ऋषिकेश मीणा ने कहा कि विवेचना में आने वाली चुनौतियों को चिन्हित कर उन्हें दूर करना ही इस कार्यशाला का मुख्य लक्ष्य है। पुलिस सभी दस्तावेजों और प्रमाणों के साथ प्रकरणों को मज़बूती से न्यायालय में प्रस्तुत करे, जिससे पीड़ित को न्याय मिल सके।

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Author: polkholnewz

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