नरसिंहपुर | 13 अक्टूबर 2026
नरसिंहपुर में बाल संरक्षण व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। छोटी-छोटी मासूम बच्चियां यदि घर-घर जाकर भिक्षा मांगने को मजबूर हैं, तो सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर इन बच्चों की देखरेख और संरक्षण की जिम्मेदारी किसकी है?
पोलखोल न्यूज़ की नजर में आई एक तस्वीर ने संवेदनशील व्यवस्था की हकीकत पर सवाल खड़े किए हैं।
जानकारी के अनुसार, करीब 6 साल की एक बच्ची और लगभग 2 साल की दूसरी मासूम बच्ची घर-घर जाकर भिक्षा मांगती नजर आईं। बच्चियों के कपड़े फटे हुए थे और उनके पैरों में चप्पल तक नहीं थी।
सुबह-सुबह इन मासूमों को इस हालत में देखकर कई सवाल सामने आते हैं।
आखिर इन मासूमों की सुध कौन लेगा?
जिले में बाल संरक्षण से जुड़े विभागों, बाल कल्याण समिति, प्रशासन और बच्चों के संरक्षण के लिए काम करने वाली स्वयंसेवी संस्थाओं (NGO) की भूमिका पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
यदि जरूरतमंद बच्चों के लिए योजनाएं और संरक्षण की व्यवस्थाएं मौजूद हैं, तो फिर इन बच्चियों तक सहायता क्यों नहीं पहुंच पा रही है? क्या संबंधित विभागों को ऐसे बच्चों की स्थिति की जानकारी है? क्या इन बच्चियों के परिवार की परिस्थितियों और उनकी सुरक्षा की जांच की गई है?
पोलखोल न्यूज़ के पास फिलहाल जिले में बच्चों के संरक्षण के लिए काम करने वाली सभी संस्थाओं, उनके कार्यक्षेत्र और उनकी जिम्मेदारियों की पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं है। इसलिए किसी संस्था या अधिकारी पर सीधे आरोप लगाने के बजाय संबंधित विभागों से तथ्यात्मक जवाब और कार्रवाई की जानकारी सामने आना जरूरी है।
सरकार की योजनाएं बनाम जमीन की हकीकत
बच्चों को शिक्षा, सुरक्षा, पोषण और सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराना समाज और व्यवस्था की साझा जिम्मेदारी है। यदि इतनी कम उम्र की बच्चियां भिक्षा मांगती दिखाई दे रही हैं, तो यह उनकी पारिवारिक परिस्थितियों और बाल संरक्षण व्यवस्था की प्रभावशीलता की जांच का विषय है।
प्रशासन और संबंधित विभागों को बच्चियों की पहचान सुरक्षित रखते हुए उनकी पारिवारिक स्थिति का पता लगाना चाहिए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि उन्हें भोजन, कपड़े, शिक्षा और आवश्यक संरक्षण मिल सके।
यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है, तो नियमानुसार जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।
पोलखोल के सवाल – जवाब कौन देगा?
इतनी कम उम्र की बच्चियां घर-घर जाकर भिक्षा मांगने को क्यों मजबूर हैं?
क्या बाल संरक्षण से जुड़े अधिकारियों को इस स्थिति की जानकारी है?
जरूरतमंद बच्चों के लिए काम करने वाली संस्थाओं की निगरानी कौन करता है?
इन बच्चियों को तत्काल सहायता और सुरक्षित भविष्य दिलाने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे?
पोलखोल न्यूज़ की अपील
यह खबर किसी संस्था या अधिकारी को बिना जांच दोषी ठहराने के उद्देश्य से नहीं, बल्कि मासूम बच्चियों की स्थिति पर जिम्मेदारों का ध्यान आकर्षित करने के लिए है। संबंधित विभाग इस मामले की जांच कर बच्चियों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराएं और अपनी कार्रवाई की जानकारी सार्वजनिक करें।
क्योंकि सवाल किसी एक विभाग का नहीं, दो मासूम जिंदगियों के भविष्य का है।
पोलखोल न्यूज़ – निष्पक्ष • निर्भीक | जनता की आवाज़, आपके साथ।








