नरसिंहपुर। 7 अक्टूबर 2026 47 वर्षीय मोहम्मद आकित, पिता कय्यूम सिद्दीकी, का कहना है कि उनके पिता एम.के. सिद्दीकी लोक निर्माण विभाग (PWD) में सहायक ग्रेड-2 के पद पर कार्यरत थे। पेंशन प्रकरण वर्ष 2023 के आसपास समाप्त होने के बाद उनकी मां को पारिवारिक पेंशन मिल रही थी। आकित के अनुसार, उनकी मां ने अपने जीवनकाल में पेंशन अपने दिव्यांग बेटे के नाम किए जाने की प्रक्रिया कराई थी।
मोहम्मद आकित का कहना है कि उन्हें बचपन से ही पोलियो है, जिसके कारण उन्हें चलने-फिरने में परेशानी होती है।
इसके बावजूद पारिवारिक पेंशन से जुड़े प्रकरण को लेकर उन्हें बार-बार संबंधित कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
आकित का कहना है कि उनकी शारीरिक स्थिति को देखते हुए बार-बार कार्यालय जाना उनके लिए काफी परेशानी भरा है।
पोलखोल की टीम ने संबंधित अधिकारी किठिया साहब से मामले को लेकर लाइव संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन संपर्क नहीं हो सका और बताया गया नंबर बंद मिला।
वहीं मोहम्मद आकित ने बताया कि इस प्रकरण की जानकारी पूनम जी को है। जब पूनम जी से फोन पर लाइव बातचीत की गई तो उन्होंने स्वयं को ऑपरेटर बताते हुए कहा कि उन्हें इस प्रकरण की कोई जानकारी नहीं है।
ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर दिव्यांग आकित की पारिवारिक पेंशन की प्रक्रिया कहां अटकी हुई है? उन्हें स्पष्ट जानकारी क्यों नहीं मिल पा रही है और अपनी पेंशन के लिए उन्हें बार-बार कार्यालय के चक्कर क्यों लगाने पड़ रहे हैं?
इस प्रकरण में वास्तविक स्थिति क्या है, कौन-सा दस्तावेज लंबित है और फाइल किस स्तर पर लंबित है, यह संबंधित विभाग के आधिकारिक जवाब के बाद ही स्पष्ट होगा।
पोलखोल का सवाल- दिव्यांग आकित को अपनी पेंशन के लिए आखिर कितने चक्कर लगाने पड़ेंगे?
नोट: संबंधित विभाग या अधिकारी का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।








