नरसिंहपुर / 6 नवंबर 2025
नरसिंहपुर। कभी पूरे प्रदेश के लिए शिक्षा और जागरूकता का प्रतीक रहा नरसिंहपुर जिला आज उपेक्षा, बेरोज़गारी, नशे और अव्यवस्थाओं से जूझ रहा है। कांग्रेस के युवा नेता अतुल चौरसिया ने जिले की गिरती स्थिति पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि साल 1992 में नरसिंहपुर को मध्यप्रदेश का पहला पूर्ण साक्षर जिला घोषित किया गया था, लेकिन 33 साल बाद भी जिले की हालत बदहाल है।
अतुल ने अपनी प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि जिस जिले ने कभी शिक्षा और समाज सुधार में मिसाल कायम की थी, वहाँ आज नशे का जाल गली-मोहल्लों तक फैल चुका है, और प्रशासन के पास न कोई ठोस योजना है, न सख्त कार्रवाई। बेरोज़गारी ने युवाओं को अंधेरे रास्तों की ओर धकेल दिया है, लेकिन जनप्रतिनिधि मौन साधे हुए हैं।
📚 शिक्षा पर सवाल, भविष्य पर अंधेरा
अतुल ने कहा कि सरकारी स्कूलों की स्थिति कमजोर है, जबकि प्राइवेट स्कूल मनमानी फीस और पारदर्शिता की कमी से अभिभावकों को परेशान कर रहे हैं। शिक्षा अब सेवा नहीं, व्यवसाय बन चुकी है।
प्रदेश के अन्य जिलों में मेडिकल, इंजीनियरिंग और विश्वविद्यालय कैंपस खुल चुके हैं, लेकिन नरसिंहपुर में आज भी कोई बड़ा सरकारी कॉलेज या तकनीकी संस्थान नहीं है।
युवाओं के पास डिग्री है, पर रोजगार नहीं। हजारों युवा रोजगार की तलाश में अपने घर-परिवार छोड़कर दूसरे राज्यों में मजदूरी करने को मजबूर हैं।
⚙️ दो मंत्री, फिर भी नरसिंहपुर बेहाल
युवा नेता ने तंज कसते हुए कहा कि जिले से दो-दो मंत्री, एक शिक्षा मंत्री और एक श्रम मंत्री, सरकार में शामिल हैं, लेकिन न शिक्षा का विस्तार हुआ, न रोजगार की योजना बनी।
उन्होंने कहा, “जब अपने ही मंत्री चुप हैं, तो हमारी आवाज़ कौन उठाएगा?”
🏥 स्वास्थ्य व्यवस्था की करुण स्थिति
अतुल चौरसिया ने कहा कि जिले की स्वास्थ्य सेवाएँ चरमराई हुई हैं।
डॉक्टरों और विशेषज्ञों के पद वर्षों से खाली हैं, मशीनें खराब हैं, दवाइयाँ नदारद हैं। ग्रामीण इलाकों में न एम्बुलेंस की सुविधा है, न डॉक्टरों की नियमित उपस्थिति।
प्राइवेट अस्पताल इलाज के नाम पर लूट मचा रहे हैं और प्रशासन मूक दर्शक बना हुआ है।
❓ जनता के सवाल
नरसिंहपुर में अब तक मेडिकल या इंजीनियरिंग कॉलेज क्यों नहीं?
स्वास्थ्य विभाग में खाली पद कब भरेंगे?
युवाओं के लिए स्थानीय रोजगार नीति कब बनेगी?
नशे और अवैध कारोबार पर ठोस कार्रवाई कब होगी?
प्राइवेट स्कूलों और अस्पतालों की मनमानी पर सरकार मौन क्यों है?
जब जिले से दो मंत्री हैं, तो विकास योजनाएँ कहाँ हैं?
✊ नरसिंहपुर जागो, बदलाव अब ज़रूरी है!
अतुल ने कहा कि अब समय है जन-जागरण का।
नरसिंहपुर के युवाओं, किसानों, व्यापारियों और बुद्धिजीवियों को मिलकर आवाज़ उठानी होगी।
सरकार को याद दिलाना होगा कि
> “साक्षरता सिर्फ किताबों में नहीं, जनता के जीवन स्तर में झलकनी चाहिए।”








