“पहले पट्टा, फिर योजना… अब बुलडोजर? प्रशासन की दोहरी नीति से 214 परिवार बेघर होने की कगार पर”!

नरसिंहपुर! 19 मार्च 2026 जिला मुख्यालय के मुशरान वार्ड में वर्षों से बसे 214 परिवार इन दिनों गहरी चिंता और असमंजस के दौर से गुजर रहे हैं। करीब 28 साल पहले शासन द्वारा इन परिवारों को विधिवत आवासीय पट्टे प्रदान किए गए थे। इतना ही नहीं, वर्ष 2018 में इन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पात्र मानते हुए लगभग ढाई लाख रुपये की आर्थिक सहायता भी दी गई, जिसके आधार पर हितग्राहियों ने कर्ज और मेहनत की कमाई जोड़कर अपने पक्के मकान तैयार किए।

अब स्थिति यह है कि उन्हीं मकानों को अतिक्रमण बताते हुए हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। सांकल रोड के दोनों ओर बसे इन परिवारों को प्रशासन की ओर से नोटिस जारी कर मकान हटाने के निर्देश दिए गए हैं। नोटिस में मकानों के निर्माण का पूरा ब्यौरा और नाप दर्ज होने से लोगों में भय और अनिश्चितता का माहौल गहरा गया है।

यदि प्रशासनिक कार्रवाई होती है, तो एक हजार से अधिक लोग सीधे प्रभावित होंगे। इनमें बुजुर्ग, महिलाएं और छोटे बच्चे भी शामिल हैं। करीब 15 दिन पहले मिले नोटिस के बाद से ही बस्ती में दहशत का माहौल है और लोग अपने भविष्य को लेकर गंभीर चिंता में हैं।

इस पूरे मामले को लेकर वार्ड पार्षद एवं नेता प्रतिपक्ष ने पत्रकारवार्ता में प्रशासन पर सवाल खड़े किए। उनका कहना है कि पहले ही सड़क निर्माण के दौरान स्थानीय लोगों ने सहयोग करते हुए लगभग 40 फीट चौड़ी सड़क के लिए जमीन छोड़ी थी। अब दोबारा फुटपाथ निर्माण के नाम पर मकान हटाने की कार्रवाई अन्यायपूर्ण है।

उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जब शासन ने पहले पट्टा दिया और फिर उसी स्थान पर प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत करोड़ों रुपये खर्च किए, तो अब उन्हीं घरों को अतिक्रमण घोषित करना समझ से परे है। उन्होंने यह भी बताया कि दो साल पहले प्रशासन ने आश्वासन दिया था कि नाले के अंदर के निर्माण नहीं तोड़े जाएंगे, लेकिन अब वह वादा भी टूटता नजर आ रहा है।

“कर्ज लेकर बनाया घर, अब जाएं तो कहां जाएं”

वार्ड निवासी सरला साहू का कहना है कि योजना की राशि से घर बनाना संभव नहीं था, इसलिए कर्ज लेकर मकान तैयार किया। अब उसे तोड़ने की बात हो रही है, जिससे परिवार सड़क पर आने की स्थिति में है।

“यही जिंदगी है हमारी, अब उजड़ गए तो जीना मुश्किल”
भूरी बाई बताती हैं कि वर्षों से यही उनका ठिकाना है। यदि यहां से हटाया गया तो उनके पास जीने का कोई सहारा नहीं बचेगा।

“मकान भी टूटे और कर्ज भी चुकाएं?”
पुरुषोत्तम ठाकुर का कहना है कि मकान पूरा करने के लिए भारी कर्ज लिया गया था। यदि मकान टूट गया तो कर्ज चुकाना असंभव हो जाएगा।

“कर्ज के बोझ में दबे, अब खाने तक के लाले”
रिजवान खान के अनुसार परिवार पहले ही कर्ज में डूबा है, ऐसे में घर टूटने का डर उन्हें मानसिक रूप से तोड़ रहा है।
फिलहाल पूरे मामले को लेकर क्षेत्र में आक्रोश और भय का माहौल बना हुआ है। अब सभी की निगाहें प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं कि क्या इन परिवारों को राहत मिलेगी या उन्हें बेघर होना पड़ेगा।

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Author: polkholnewz

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