वीडियो से घृणा तक: आवारा मानसिकता का सच और खामोश समाज की भागीदारी!”

नरसिंहपुर। 24 जनवरी 2026 आज सोशल मीडिया पर सुर्खियों में रहे दो युवकों के आपत्तिजनक वीडियो मामले में पुलिस की त्वरित और सख्त कार्रवाई निस्संदेह तारीफ के लायक है। पुलिस ने जिस तेजी से आरोपियों को चिन्हित कर गिरफ्तार किया, उसने यह स्पष्ट किया कि कानून अब ऐसे कृत्यों पर चुप नहीं बैठेगा। करीब एक वर्ष बाद 🗣️ पोलखोल का स्वर थोड़ा उग्र हुआ—और इसके पीछे का कारण भी समाज भली-भांति जानता है।

जिस तरह उन युवकों ने नारी के लिए अपशब्दों, वस्तु-समान भाषा और गालियों का प्रयोग करते हुए वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर व्यूज बटोरने की कोशिश की, वह मानसिकता की भयावह गिरावट को दर्शाता है।यह केवल एक वीडियो नहीं, बल्कि उस सोच का आईना है जो पढ़ाई कर रही बच्चियों और युवतियों को भी सुरक्षित नहीं मानती। ज़रा सोचिए, उन छात्राओं पर क्या बीतती होगी, जिन्हें ऐसी घिनौनी नज़रों का सामना करना पड़ता है।

सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि ऐसे युवकों में पुलिस का भय क्यों नहीं दिखता?यह सच है कि पुलिस के भी अपने दायरे और कानूनी मर्यादाएं होती हैं, लेकिन जब अपराधी स्वयं हर मर्यादा तोड़ते हैं, तब कानून के पालन की सख्ती और प्रभावशीलता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। ऐसे गंभीर मामलों में कठोरतम कार्रवाई की मांग इसलिए उठती है ताकि भविष्य में कोई भी ऐसी हरकत करने से पहले सौ बार सोचे।

पिछले तीन दशकों में पहली बार नरसिंहपुर की स्थिति इस कदर चिंताजनक प्रतीत हो रही है। केवल माता-पिता को समझाइश देकर समस्या का समाधान नहीं होगा। पूर्व में भी शहर ने कई जघन्य घटनाएं देखी हैं—अस्पताल परिसर में युवती की खुलेआम हत्या, एक युवती के घर में घुसकर पेट्रोल डालकर आग लगाने जैसी घटनाएं, और कई मामले जो ‘मान-मर्यादा’ के नाम पर दबा दिए गए। समय-समय पर इन मुद्दों को उजागर किया गया, पर जिम्मेदार तंत्र ने अक्सर इन्हें गंभीरता से नहीं लिया।

इतनी ही जिम्मेदारी शहर की उस मूक जनता की भी है, जो ऐसी घटनाओं को अपनी आंखों के सामने होते देखकर भी डर या उदासीनता के कारण चुप रहती है। मौके पर हस्तक्षेप या रोकने का प्रयास करने के बजाय बाद में सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देना समाज को सुरक्षित नहीं बनाता। “हमें क्या लेना-देना” की मानसिकता ही अपराधियों के हौसले बढ़ाती है।

कल की पुलिस कार्रवाई एक सही दिशा में कदम है, लेकिन यह भी स्पष्ट संदेश है कि केवल कानून नहीं, समाज की जागरूकता और सामूहिक जिम्मेदारी ही ऐसी आवारा और नशेड़ी मानसिकता पर स्थायी रोक लगा सकती है।

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Author: polkholnewz

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