108 एम्बुलेंस बनी मजबूरी की नहीं, परेशानी की सवारी!”

नरसिंहपुर। 17 जनवरी 2026
मध्यप्रदेश की 108 एम्बुलेंस सेवा मरीजों के लिए राहत कम और परेशानी अधिक साबित हो रही है। जटिल बुकिंग प्रक्रिया और नियमों की वजह से गंभीर मरीजों को समय पर अस्पताल तक नहीं पहुंचाया जा रहा है। ताज़ा मामला नरसिंहपुर जिले के करेली अस्पताल से सामने आया है, जहां एक विकलांग मरीज को एम्बुलेंस नहीं मिल सकी।

करेली अस्पताल में बुधवार 14 जनवरी को दोनों पैरों से विकलांग एक मरीज को किसी व्यक्ति द्वारा भर्ती कराया गया। ड्यूटी डॉक्टर ने प्राथमिक उपचार के बाद मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे 15 किलोमीटर दूर जिला अस्पताल नरसिंहपुर रेफर किया।

लेकिन जब 108 एम्बुलेंस सेवा के लिए कॉल किया गया, तो दो दिन तक एम्बुलेंस नहीं पहुंची। कॉल सेंटर से बताया गया कि मरीज के साथ कोई अटेंडर नहीं है, इसलिए एम्बुलेंस उपलब्ध नहीं कराई जा सकती।

गुरुवार 15 जनवरी

को डॉक्टर द्वारा दोबारा 108 पर कॉल किया गया। करीब एक घंटे तक बुकिंग प्रक्रिया चलती रही, लेकिन अंत में फिर वही जवाब मिला, अटेंडर नहीं होने पर एम्बुलेंस नहीं दी जा सकती। इस दौरान हमारे संवाददाता ने एम्बुलेंस कॉल सेंटर और डॉक्टर के बीच हुई बातचीत की रिकॉर्डिंग भी की है।

🎙️ बाइट:
रिम्पी ठाकुर, ड्यूटी डॉक्टर

❓ बड़ा सवाल
जब 108 जैसी आपातकालीन सेवा विकलांग और गंभीर मरीजों को अटेंडर के अभाव में मदद देने से इंकार कर दे, तो ऐसी व्यवस्था की जिम्मेदारी किसकी है? यह मामला स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

 

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Author: polkholnewz

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