नरसिंहपुर / 30 दिसंबर 2025
बरमान नर्मदा घाट से जुड़ा पुजारी–सीईओ विवाद बीते दो दिनों से चर्चा का केंद्र बना रहा। ब्राह्मण समाज में आक्रोश, ज्ञापन, बयानबाज़ी और सोशल मीडिया पर बहस,सब कुछ तेज़ था। लेकिन इस पूरे घटनाक्रम में एक ऐसा किरदार भी सामने आया, जिसने बिना बोले ही सबका दिल जीत लिया।
जिस पुजारी से जिला पंचायत सीईओ की कहासुनी हुई, उन्होंने आज वीडियो के माध्यम से साफ कहा कि वे किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं चाहते। वहीं दूसरी ओर, समाज में यह रोष था कि कर्मकांडी ब्राह्मण से अभद्रता बर्दाश्त नहीं की जा सकती।
लेकिन इस पूरे प्रकरण का सबसे पीड़ित चेहरा वह युवक रहा, जिसे मौके पर सीईओ साहब का थप्पड़ झेलना पड़, जो निस्संदेह गलत था। उस युवक ने न तो कैमरे पर आकर कोई बयान दिया, न लिखित शिकायत की, न ही किसी तरह की सहानुभूति बटोरने की कोशिश की।
यही खामोशी उसे खास बनाती है।
जहां एक ओर बयान, प्रतिवेदन और राजनीतिक रंग दिखा, वहीं उस युवक का संयम, उसकी चुप्पी और उसकी मर्यादा इस पूरे विवाद में सबसे ऊंची नजर आई।
तो सोचिए🤔
क्या ज्यादा ज्ञानी पुजारी हैं, जिन्होंने विवाद को यहीं विराम देने की बात कही?
या सीईओ, जिनकी भूमिका पर सवाल उठे?
या फिर वह युवक, जिसने अन्याय सहकर भी शांति को चुना?
पोलखोल मानता है, इस कहानी का असली हीरो वही युवक है।
हालांकि – घटना से युवक जिस समाज माझी समाज से आता है, माझी समाज इस घटना से आहत है, पर युवक के धैर्य और संस्कार ने यह साबित कर दिया की उसकी सोच ऊंची कितनी सकारात्मक है!
जिसने बिना शोर किए, बिना आरोप लगाए, इंसानियत और धैर्य का ऐसा उदाहरण पेश किया, जो आज के समय में दुर्लभ है।
पोलखोल का उसे सलाम।
नोट – हो सकता है? की कुछ संगठन या लोग या ओछी राजनीति की मानसिकता रखने वाले कुछ कतिपय कथित संगठन या दूषित विचार धारा के लोग युवक को बहकाने की कोशिश कर सकते हैं? . पर वर्तमान स्थिति में युवक का धैर्य काबिले तारीफ हैं!








