नरसिंहपुर | 23 दिसंबर
शहर में महिला सुरक्षा और सामाजिक मर्यादा को लेकर बड़े-बड़े दावे करने वाली नरसिंहपुर पुलिस की जमीनी हकीकत सवालों के घेरे में है। पार्क, धार्मिक स्थल और कैफे अब खुलेआम लवर पॉइंट में तब्दील होते जा रहे हैं, लेकिन जिस निर्भया स्क्वॉड और विशेष अभियानों का ढोल पीटा जाता रहा, वह ज़मीन पर कहीं नजर नहीं आ रहा।
चिंताजनक पहलू यह है कि इन स्थलों पर सिर्फ युवक-युवतियां ही नहीं, बल्कि नाबालिग लड़के-लड़कियां भी शामिल हैं, जो परिजनों को स्कूल, कॉलेज और कोचिंग का बहाना देकर पार्कों में समय बिता रहे हैं। परिजनों को इसकी भनक तक नहीं है।
ताज़ा मामला सोमवार, 22 दिसंबर का है। पोलखोल को एक हिंदू संगठन के पदाधिकारी ने सदर मढ़िया रोड स्थित पार्क का वीडियो उपलब्ध कराया, जिसमें युवक-युवतियां पार्क की कुर्सियों पर बैठकर समय बिताते नजर आ रहे हैं। वीडियो में कुछ लड़कियां स्कूल ड्रेस में भी दिखाई दे रही हैं, जो साफ तौर पर व्यवस्था और निगरानी की पोल खोलता है।
पदाधिकारी के अनुसार, जब उन्होंने इस विषय में महिला थाना प्रभारी को सूचना दी, तो जवाब मिला..
“निर्भया अब काम नहीं कर रही”
और फोन काट दिया गया।
सवाल यह नहीं है कि निर्भया स्क्वॉड सक्रिय है या नहीं, सवाल यह है कि क्या महिला पुलिस की जिम्मेदारी सिर्फ नाम की रह गई है?
क्या किसी नागरिक द्वारा सूचना दिए जाने के बाद मौके पर जाकर समझाइश देना, कार्रवाई करना या स्थिति को नियंत्रित करना पुलिस का दायित्व नहीं है?
पुलिस के इसी गैर-जिम्मेदाराना रवैये के कारण ऐसे मामले लगातार सामने आ रहे हैं।
एक ओर अधिकारी वाहवाही लूटने में व्यस्त हैं, वहीं दूसरी ओर ज़मीन पर महिला सुरक्षा और नाबालिगों की निगरानी पूरी तरह लापता दिखाई दे रही है।
एसपी ऋषिकेश मीना द्वारा चलाए गए अभियानों की चर्चा तो खूब होती है, लेकिन पार्क, धार्मिक स्थल और सार्वजनिक स्थानों पर टीम की सक्रियता क्यों नहीं दिखती?
क्या यह अभियान सिर्फ कागज़ों और प्रेस विज्ञप्तियों तक सीमित हैं?
शहर पूछ रहा है…
विश्वनीय – सूत्रों से पता चला है. की निर्भया को पुलिस लाईन में कर दिया है, और उन्हें भ्रमण के लिए मना किया गया है?
महिला सुरक्षा के नाम पर किए जा रहे दावों की सच्चाई आखिर कब सामने आएगी?








